नाक द्वारा किस्मत बदले

स्वर चिकित्सा #।                                               स्वर तीन प्रकार के होते हैं।                                   (१) चंद्र स्वर- इसमें बाईं नासिका द्वारा वायु निकलती है।                                                      (२) सूर्य स्वर- इसमें दाहिनी नासिका द्वारा वायु निकलती है।                                                      (३) सुषुम्ना स्वर- इसमें दोनों नासिका छिद्र द्वारा वायु निकलती है।                                                       हमारी नासिका से कभी चंद्र स्वर निकलता है कभी सूर्य स्वर निकलता है तथा बहुत कम समय के लिए सुषुम्ना स्वर निकलता है यदि हम इन्हें नियंत्रित करना सीख ले तो अनेक रोगों से छुटकारा पा सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।                                                                                                         (१)सुबह उठते ही देख ले कि कौन सा स्वर चल रहा है तथा उसी तरह की हथेली का दर्शन करें उसी तरफ के गाल आंख मुंह का स्पर्श करें और उसी तरफ का पांव पहले जमीन पर रखकर आगे बढ़े तो दिन बहुत ही अच्छा गुजरता है।                                           (२)कभी भी किसी शुभ कार्य में जाएं तो जिस तरफ का नाक स्वर में चल रहा हो वह पैर चौखट से बाहर सबसे पहले रखें उससे आपके सारे काम हो जाएंगे     (३)भोजन करने के बाद चित लेट कर श्वास लें फिर दाहिने करवट लेट कर १६ स्वास ले तो भोजन का पाचन अच्छी प्रकार से होता है।                             (४) दर्द दूर करने का उपाय- अचानक उठने वाले दर्द को दूर करने का सुगम उपाय यह है कि जो स्वर चल रहा है उसे बदल दे तत्काल राहत मिल जाएगी।                                                                                         स्वर्ग बदलने के नियम।                         (१)जिस तरफ का स्वर चलाना हो उसके उल्टे करवट दो 4 मिनट लेट कर सो जाने पर इच्छित स्वर चलना शुरू हो जाता है                                         सुषुम्ना स्वर- योग , भजन, ध्यान, प्रार्थना इत्यादि सुषुम्ना स्वर के चलते समय करनी चाहिए यानी दोनों स्वर चलते हो तभी करने से सिद्ध होते हैं।                                           

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