कमल के फूल ,जड़ और बीज
कमल पानी में पैदा होने वाली वनस्पति है यह अत्यंत नाजुक होता है इसके पत्ते गोल बड़े-बड़े प्याले के आकार तथा अरबी के पत्तों की तरह होती हैं इन पत्तों पर पानी की बूंद नहीं ठहरती यह चौड़े चौड़े पत्ते थाली की तरह पानी में तैरते हुए दिखाई देते हैं पत्तों के बीच जो ठंडी होती है उसे कमल की नाल कहते हैं इन पुष्पामें जो पीला जीरा होता है उसको कमल केसर कहते हैं कमल के बीजों को कमलगट्टे कहते हैं कमल सफेद लाल और रंगभेद से अनेक प्रकार के होते हैं (१)##नीला कमल शीतल पित्त नाशक रसायन कर्म में उत्तम देव की जड़ से दृढ़ करने वाला तथा वीर्य वर्धक है। (२)रक्त कमल चपरा कड़वा मधुर ठंडा रक्तशोधक पित्त कफ और को साफ करने वाला तथा वीर्य वर्धक होता है। (३) सफेद कमल शीतल स्वादिष्ट आंखों को लाभदायक तथा रूचि विकार सूजन सब प्रकार के विस्फोटकों को दूर करने वाला होता है कमल के कोमल पत्ते शीतल ऐप कड़वे होते हैंयह शरीर की जलन को दूर करने वाले तथा प्यास अश्वरी बाबासीर और कुष्ठ रोग में लाभदायक होते हैं। (४) कमल की जड़#कड़वी कब कितने लाभदायक और प्यास को बुझाने वाली होती है इसके केसर शीतल वीर्य वर्धक संकोचन एवं प्यास विश सूजन तथा खूनी बवासीर में लाभदायक है इसके पूर्व शीतल रक्त विकार चर्म रोग नेत्र रोग में लाभदायक है। (५)कमल के बीज अर्थात कमलगट्टे स्वादिष्ट रूचि कारक पाचक गर्व स्थापक वीर्य वर्धक स्थापित रक्त दोस्त वमन रक्तपित्त को नाश करने वाले होते हैं इसका शहद अत्यंत पौष्टिक त्रिदोष नाशक और सब प्रकार के नेत्रों रोगो को दूर करने वाला होता है। (१) बाबासीर### खूनी बवासीर में इसके केसर को शक्कर एवं मक्खन के साथ देने से लाभ होता है। (२) (गर्भ गिरने की शिकायत)### जिन स्त्रियों को हमेशा गर्भ गिरने की शिकायत हो उसके लिए इसके बीच बहुत ही लाभकारी है इसके बीजों की सब्जी बनाकर खाने से गर्भ गिरने की शिकायत ठीक हो जाती है। (३) (रक्त प्रदर)###कमल की केसर मुल्तानी मिट्टी और मिश्री के चूर्ण की फंकी देने से रक्त प्रदर और रक्त में लाभ होता है। (४)( सर्प विष)###कमल के माता के सर को काली मिर्च के साथ पीसकर पीने और लगाने से सांप सांप के विष में लाभ होता है। (५) (दाद)###कमल की जड़ को पानी में घिसकर लेप लगाने से दाद और दूसरे त्वचा रोग मिलते हैं। (६)(पुराना बुखार)### पुराने बुखार में उत्पन्न अनार का छिलका और कमल का केसर यह दोनों बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चावल के पानी के साथ लेना चाहिए कहां जाता है इसके पीने से पुराना बुखार मिट जाता है। (७)(नेत्र रोग)###कमल के फूल की पंखुड़ियों को तोड़ते समय शहद के समान एक तरह का रस निकलता है जिसको प्राग मधु कहते हैं इस मधु को नेत्र में अंजन से नेत्रों के अनेक रूप मिलते हैं।
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